अब स्मार्ट पर्स सुरक्षित रखेगा आपके एटीएम कार्ड, चोरी होने पर एप करेगा अलर्ट, खुद-ब-खुद ब्लॉक हो जाएंगे

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आइआइटी कानपुर के इन्क्यूबेटर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग तकनीक पर आधारित सेंसरयुक्त स्मार्ट पर्स बनाया है, जो बैंक खाते की रकम को सुरक्षित करेगा। पर्स में रखे डेबिट, क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल मोबाइल पर एप्लीकेशन द्वारा बैंक से सत्यापन के बाद होगा। साफ्टवेयर बैंक से लिंक होने पर पर्स चोरी भी हो जाता है तो उसमें रखे बैंकों के कार्ड खुद निष्क्रिय हो जाएंगे। चोर पर्स खोलेगा तो एप पर उसकी लोकेशन भी पता लग जाएगी। इन्क्यूबेटर द्वारा इसके लिए निजी और राष्ट्रीयकृत बैंकों से संपर्क किया जा रहा है।

इन्क्यूबेटर दीपक चूडाप्पनवर ने बेंगलुरु में स्टार्टअप इन्फिनिक्यू सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड शुरू किया है। उन्होंने आइआइटी के विशेषज्ञों की मदद से स्मार्ट चिप आधारित पर्स, साफ्टवेयर और एप तैयार किया है। इसका नाम सेल्वस सिक्योर रखा है। पर्स खोलने या बंद करने पर एप्लीकेशन और साफ्टवेयर में पूरा रिकार्ड, लोकेशन, समय आदि दिखेगा।

साफ्टवेयर के बैंक से कनेक्ट होने से उसके डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर्स में रखने पर सुरक्षित हो जाएंगे। दीपक ने बताया कि तकनीक का प्रदर्शन देख कुछ बैंकों ने दिलचस्पी दिखाई है। इसी प्रकार की प्रणाली को नेट बैंकिंग में यूजरनेम, पासवर्ड व क्यूआर कोड से भुगतान के लिए और आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड आदि के लिए भी तैयार किया जा रहा है।

तकनीक के होंगे तीन भाग, सर्वर, पर्स व एप

दीपक ने बताया कि इस तकनीक के तीन भाग पर्स, एप व सर्वर हैं। सर्वर से फोन का एप्लीकेशन जुड़ा है और एप्लीकेशन पर्स की चिप से कनेक्ट होगा। स्‍टार्टअप कंपनी अपने सर्वर को जब बैंक के सर्वर से लिंक करेगी, तब ग्राहक का सत्यापन होगा। ग्राहक को एप अपने मोबाइल में डाउनलोड करना पड़ेगा। इस पर्स की अनुमानित कीमत तीन हजार रुपये होगी।

एप करेगा अलर्ट, पर्स से निकाला गया कार्ड

ग्राहक जब स्मार्ट पर्स खोलकर कार्ड निकालेगा तो मोबाइल एप के साथ ही बैंक के सर्वर पर भी अलर्ट आता है और 180 सेकेंड के बाद कार्ड को लेन-देन के लिए निष्क्रिय कर देता है। जब ग्राहक कार्ड वापस रखता है तो पर्स वापस से सूचना देता है कि कार्ड प्राप्त हो गया है और सुरक्षित है। कार्ड खोने या क्लोन होने पर काम नहीं करेगा। मोबाइल से 10 मीटर दूर होने पर संपर्क टूट जाएगा और 180 सेकेंड बाद सभी कार्ड स्वत: निष्क्रिय हो जाएंगे।

साइबर फ्राड से होगा बचाव

आइआइटी के स्टार्टअप इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर के प्रभारी प्रो. अंकुश शर्मा के मुताबिक इस तकनीक से साइबर फ्राड व बैंक डेटा के गलत इस्तेमाल की घटनाओं से बचाव होगा। तकनीक से ग्राहक अपने बैंक कार्ड संबंधी डाटा को खुद नियंत्रित कर सकेंगे। डाटा चोरी भी हो जाए, तो उसकी उपयोगिता नहीं होगी और डाटा के सही मालिक को लगातार सूचना मिलती रहेगी। इससे बैंक भी पेमेंट फ्राड को रोक सकेंगे।

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