156 देशों के जल से रामलला का अभिषेक हुआ:13 देशों के राजदूत और 40 देशों के अप्रवासी भारतीय भी अयोध्या आए

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अक्षय तृतीया में अयोध्या में राम मंदिर का 156 देशों के जल से अभिषेक किया गया। इसमें अमेरिका के 14 मंदिरों और 12 नदियों का जल भी शामिल है। 13 देशों के राजदूत, 40 देशों के अप्रवासी भारतीय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुंचे हैं।

इसमें तजाकिस्तान के ताज मोहम्मद भी हैं। उन्होंने बाबर की जन्मभूमि की नदी कश्क-ए-दरिया समेत कई मुस्लिम देशों की नदियों का जल भेजा है। मणिराम छावनी के सभागार में कार्यक्रम सुबह 10 बजे से शुरू हुआ। सबसे पहले हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। वहीं, RSS के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश ने नया नारा “भारत जय जगत” दिया।

दिल्ली के पूर्व BJP विधायक विजय जौली श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के साथ मिलकर यह कार्यक्रम कर रहे हैं। जौली ने बताया, ”जलाभिषेक के लिए 156 देशों का जल कलश अयोध्या ला गया। इसमें उज्बेकिस्तान के ताशकंद में चिरचिक नदी, तजाकिस्तान की वख्श नदी, यूक्रेन की डेनिस्टर, रूस की वोल्गा, मॉरिशस की गंगा तालाब और हिंद महासागर का जल भी है।’

संजय निषाद बोले- निषाद समाज रावण राज्य को खत्म करने में जुटा
कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने कहा, “श्रृंगवेरपुर को पर्यटन केंद्र बनाने का प्रयास हो रहा है। इजराइल की लाइब्रेरी में यह पढ़ने को मिला कि राम के ईश्वर रूप का निषादराज ने सबसे पहले अनुभव किया था। अब पूरे देश में निषाद मछुआरों की सेना तैयार करके रावण राज्य खत्म करने में जुटा हूं।”

मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि 5 अगस्त 2020 को पीएम नरेंद्र मोदी ने भूमि पूजन किया था। तब 1000 स्थानों से जल व रज गर्भगृह को समर्पित हुआ। आज जिन्होंने जल भेजा है, उन्हें ट्रस्ट के संतों की तरफ से सम्मान। यह आयोजन इंटरनेशनल हिस्ट्री है।

जैन मुनि लोकेश बोले- अक्षय तृतीया से भगवान ऋषभ देव का गहरा संबंध
जैन मुनि लोकेश ने कहा कि राम का भव्य मंदिर बन रहा है। अक्षय तृतीया से भगवान ऋषभ देव का गहरा संबंध है। मेरा सौभाग्य है कि यहां शामिल होने आया हूं। जो भगवान ऋषभदेव का जैन धर्म में स्थान, वही गौरव श्रीराम का है।

यतींद्रानंद गिरी ने कहा कि औरंगजेब की मजार पर दीपक जलाने वालों को आज भीख मांगनी पड़ रही है। वहीं, तिब्बती संसद के स्पीकर कै. मको सोनम ने कहा कि यह इवेंट सफल है, राम के लिए आस्था बढ़ाने वाला आयोजन है। पूर्व आर्मी चीफ जनरल जेजे सिंह ने कहा कि मैं मानता हूं कि हम सभी इकट्‌ठा हो जाए, तो हमें कोई जीत नहीं सकता है।

’31 महीने में जुटाया जल’
विजय जौली ने बताया, “हमारे जलाभिषेक कार्यक्रम के लिए इतने देशों का जल जुटाने के लिए 31 महीने का समय लगा। स्टॉकहोम से आशीष ब्रम्हभट्‌ट ने कोरोना काल के बाद सबसे पहली विस्तारा की ​फ्लाइट ​से जल भेजा। हमने यूक्रेन और रूस के साथ चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भी जल मंगाया है।”

उन्होंने बताया, “जलाभिषेक कार्यक्रम श्रीराम की अथक भक्ति का परिणाम हैं। श्रीराम विश्वव्यापी हैं। उनके मंदिर को पूरे विश्व का समर्थन है। हमारा प्रयास पूरे विश्व को आतंक और युद्ध से मुक्त कर श्रीराम की भक्ति और प्रेम से जीतने का संदेश देना है। इसमें हिंदू, मुस्लिम, जैन, पारसी और बुद्ध आदि विश्व के कई धर्मों के लोगों का सहयोग है।”

उन्होंने कहा, “इस आयोजन में शामिल होने के लिए फिजी से राजेंद्र प्रसाद, आस्ट्रेलिया से परशुराम, मकाऊ से अरुणा झां, नेपाल के सांसद विनोद चौधरी, मॉरीशस से बालाजी, रोमानिया से विजय मेहता, सिंगापुर के पुरुषोत्तम कुमार सहित युगांडा, रोमानिया, मंगोलिया, भूटान, श्रीलंका, नार्वें समेत 40 देशों के करीब 200 लोगों का समूह आया है।”

उन्होंने बताया,” हम लोग रामजन्मभूमि पथ पर दोपहर में पहुंचे हैं। जहां से रामलला के दरबार में दर्शन किया है। अब राम मंदिर का जलाभिषेक किया जाएगा। पूरे कार्यक्रम को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का निर्देशन और पूज्य संतों का मार्गदर्शन मिलेगा। कार्यक्रम में मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास और लोकेश मुनि का आशीर्वाद रहेगा। कलश पूजन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होगा।

इन 13 देशों के राजदूत रहे शामिल
कार्यक्रम में अल्बानिया के राजदूत देवेंद्र पाल सिंह, फिजी के राजदूत कमलेश शशि प्रकाश, रोमानिया विजय मेहता, मंगोलिया ज्ञान बोर्ड, भूटान के किमजोंग दारजिक, सूरीनाम अरुण कुमार, मोंटीनीग्रो डॉ. जैनेश दरबारी, तूआलू के डॉ. दीपक जैन, कामरास के एस. गंजू, ग्रीस एलेकजेंडर वाड्रेश, कोपॉवर्ड के संजय कुमार दीवान के अलावा हम्फी और कंबोडिया के राजदूत शामिल थे। सभी राजदूत उन देशों के हैं, जो भारत में कार्यरत हैं।

जल लाने में दिक्कतों की शॉर्ट मूवी भी बनी
सुरीनाम, चीन, यूक्रेन, रूस, कजाकिस्तान, कनाडा, तिब्बत जैसे देशों के नदियों का जल अयोध्या लाया गया है। इतने सारे देशों से जल लाने में किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा, इसके लिए एक शॉर्ट मूवी भी बनाई गई है। जिसे दिखाया गया।

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