9 साल बाद RBI ने की सोने की खरीदारी, आखिर क्यों?

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केन्द्रीय रिजर्व बैंक ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि उसने अपने सोने के भंडार में 8.46 मेट्रिक टन का इजाफा किया है. रिपोर्ट के मुताबिक आरबीआई ने यह खरीदारी वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान की. इस खरीदारी से मौजूदा समय में रिजर्व बैंक के खजाने में 566.23 मेट्रिक टन सोने का भंडार है और रिजर्व बैंक के मुताबिक यह खरीदारी उसने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए किया है.

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 30 जून 2018 को 566.23 टन सोने के भंडार की तुलना में केन्द्रीय बैंक के पास 30 जून 2017 तक 557.77 टन सोने का भंडार मौजूदा था. रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान उसने सोने के भंडार में इजाफे के साथ-साथ विदेशी मुद्रा भंडार में भी इजाफा किया. यह कदम उसने बैंक के रिस्क जिसमें साइबर सिक्योरिटी शामिल है को देखते हुए उठाया है.

इससे पहले केन्द्रीय बैंक ने सोने के भंडार में इजाफा नवंबर 2009 में किया था. आरबीआई की यह खरीदारी इंटरनैशनल मॉनिटरी फंड के भंडारण में इजाफा करने के सिमित कार्यक्रम के तहत की गई थी और केन्द्रीय बैंक ने 200 मेट्रिक टन सोना खरीदकर अपने भंडारण में इजाफा किया था.

खास बात है कि आरबीआई एक्ट केन्द्रीय रिजर्व बैंक को सोने में खरीदारी करने की इजाजत देता है. हालांकि रिजर्व बैंक सामान्य तौर पर चीन और रूस के केन्द्रीय बैंकों की तरह सोने की खरीद-फरोख्त नहीं करता. लिहाजा, इस खरीदारी के बाद एक बार फिर बाजार में लोगों का मानना है कि इससे साफ संकेत मिल रहा है कि वैश्विक बार में सोने की मांग में इजाफा होने की संभावना है. गौरतलब है कि इस संकेत को और भी बल इस बात से मिल रहा है कि निवेश के अन्य संसाधनों में वैश्विक स्तर पर रिटर्न कम हो रहा है और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल बन रहा है. ऐसी स्थिति में सोने में निवेश सुरक्षा और रिटर्न के लिहाज से बेहद अहम है.

जानकारों का मानना है कि अमेरिका में ईल्ड में हो रहे इजाफे ब्याज दरों में जारी बढ़ोत्तरी की स्थिति में सोने में निवेश बेहद अहम है. अमेरिकी आंकड़ों के मुताबिक इस परिस्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रैल और जून के दौरान लगभग 10 बिलियन डॉलर के मूल्य की अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटी की बिकवाली की है. वहीं रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा के कुल भंडार में लगभग 405 बिलियन डॉलर या 60 फीसदी बॉन्ड और सिक्योरिटी में मौजूद है. लिहाजा, बॉन्ड ईल्ड में हो रहे इजाफे के चलते नुकसान से बचने के लिए भंडार से बॉन्ड को कम करना जरूरी है.

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